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सुवर्णरेखा में मछली मौत: MLA रॉय ने प्रदूषण की जांच की मांग की

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जमशेदपुर: शहर के लोगों के लिए गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 एक चिंताजनक दिन रहा, जब सुवर्णरेखा नदी में हजारों मछलियां मृत पाई गईं। यह घटना ताता नगर इलाके में सबसे ज्यादा देखी गई, जहां नदी का पानी दुर्गंधपूर्ण हो गया था। MLA सरयू रॉय ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह घटना नदी के प्रदूषण का स्पष्ट संकेत है और इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

ताता नगर में सबसे ज्यादा प्रभाव

ताता नगर क्षेत्र में मछलियों की मौत का प्रभाव सबसे अधिक देखा गया। स्थानीय मछुआरों ने बताया कि बुधवार रात से ही मछलियां मरने लगी थीं और गुरुवार सुबह तक स्थिति गंभीर हो गई। रमेश साहू, जो पिछले 30 सालों से इस नदी पर मछली पकड़ रहे हैं, ने बताया, “मैंने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में मछलियां मरते नहीं देखा। यह प्रदूषण के कारण हुआ है।” उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना से उनकी आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि वे इस नदी पर ही निर्भर हैं।

MLA रॉय की मांग: तत्काल जांच और कार्रवाई

विधायक सरयू रॉय ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सुवर्णरेखा नदी जमशेदपुर के लोगों के लिए जीवन रेखा है और इसके प्रदूषण से शहर के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। रॉय ने 3 अप्रैल 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ बैठक करने की घोषणा की है, जिसमें इस मामले पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जांच में औद्योगिक इकाइयों की लापरवाही पाई जाती है, तो उनकी बिजली कनेक्शन रद्द करने की सिफारिश की जाएगी।

प्रदूषण के संभावित कारण

स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि नदी में प्रदूषण के कई कारण हो सकते हैं। इनमें औद्योगिक इकाइयों द्वारा बिना उपचारित अपशिष्ट जल का सीधे नदी में डालना, कृषि कार्यों में उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों का बह जाना और शहरी क्षेत्रों से निकलने वाले सीवेज का शामिल है। पिछले वर्ष, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नदी के किनारे स्थित 15 औद्योगिक इकाइयों को नोटिस भेजा था, लेकिन कार्रवाई धीमी रही है।

सुवर्णरेखा नदी का महत्व और चुनौतियां

सुवर्णरेखा नदी झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों से होकर बहती है और यह कई गांवों और शहरों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। नदी का पानी सिंचाई, पेयजल और मछली पालन के लिए उपयोग किया जाता है। लेकिन, नदी प्रदूषण की समस्या गंभीर है, जिसके कारण नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ रहा है। 2021 में, झारखंड सरकार ने नदी को साफ करने के लिए ₹50 करोड़ की योजना शुरू की थी, लेकिन अभी तक इसका प्रभाव दिखाई नहीं दिया है।

आगे क्या होगा?

MLA सरयू रॉय ने आश्वासन दिया है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि नदी को साफ किया जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि वे नदी को प्रदूषित करने से बचें और स्वच्छता अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें। जिला उपायुक्त रवि कुमार ने कहा कि वे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित करेंगे और जल्द ही रिपोर्ट पेश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

And यह घटना जमशेदपुर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक चेतावनी है। But यह भी एक अवसर है कि हम अपनी नदियों को बचाने के लिए एकजुट हों और एक स्वच्छ भविष्य का निर्माण करें।

But इस बीच, मछुआरों और स्थानीय लोगों के लिए यह एक कठिन समय है। वे अपनी आजीविका के लिए चिंतित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी।

पर्यावरण समाचार

Source: https://news.google.com/rss/articles/CBMi7AFBVV95cUxNLUFXQWFONFl3ZFlPcE5nclhSQ0FDZWd2NllPYVE4eVpxUU81QzllSmh6WHFRb2VxOXM3OU1yRHE3YVFMLWJfSllrSy1aTm84MGp5SW9McndBNVI3dWhqc2o2bUVtODlWSHpXcWtCU0t2VTA2eEd1elVDNzFVakZ4STY0M1RleU1OajZqRTNLdEcxcWFPM1NBM3NxQnp3Um45QkZKajl0Q192d21BU20zVERCNmg5aUtVWjd3RFVvODF6SmhXaHpGVkJVVDk1RlhGRWxQYWNrUUEtd0UwUjV3bHJyTk9weDlqLWhEMdIB8gFBVV95cUxQeFl2eWhKWFQyY0xKRldwN2QyWkprZ2JReVBzbFdrUXN1ZGlieVNsM1IzQjJ4enNWeXdlT3Y5dUkzLUt3eURscktxRDhkS2tEbXBSdDVSUUlBYjhJWW5BaGh2SkJFLV8yM1VrWkJ2WGNSdFJ3aG14LTczME9jNnNUSTJWQU9nSUdudS1qa2p6bDg2dVB1a2tqNzJVOEZJYjdTZ3pqcVk2U0g0cUcxT2ZRNnNMemc2dlJCLUtzMjhLVDFIMTF4Z3d2MkVwVGZwa2FBOU1ENkc3SjV3ZDVRT1RNQTZLSEJmR0wwOXJyMGNtb0VkUQ?oc=5&hl=en-US&gl=US&ceid=US:en

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