हादसे से पहले क्या हुआ था?
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हादसे से पहले एयर एंबुलेंस की उड़ान में कई बदलाव किए गए थे। 4 अप्रैल 2026 को रांची से दिल्ली जाने वाली इस उड़ान में 7 लोग थे, जिनमें 2 डॉक्टर और 2 मरीज भी शामिल थे। उड़ान के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
जांच एजेंसियों के अनुसार, एयर एंबुलेंस की ऊंचाई 10,000 फीट से घटकर 5,000 फीट पर आ गई थी, जो एक सामान्य ऊंचाई से बहुत कम थी। इसके अलावा, उड़ान के दौरान एयर एंबुलेंस की गति भी बहुत तेज थी, जो एक सामान्य गति से अधिक थी।
जांच एजेंसियों का कहना है
जांच एजेंसियों के अनुसार, हादसे के कारणों का पता लगाने में अभी भी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि एयर एंबुलेंस के ब्लैक बॉक्स को बरामद कर लिया गया है, जिससे हादसे के कारणों का पता लगाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, जांच एजेंसियां एयर एंबुलेंस के पायलट और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ भी कर रही हैं।
झारखंड सरकार ने भी हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एयर एंबुलेंस सेवाएं और सुरक्षा
एयर एंबुलेंस सेवाएं मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन हादसे के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या एयर एंबुलेंस सेवाएं पर्याप्त सुरक्षित हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, एयर एंबुलेंस सेवाओं को और सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाने होंगे।
इसके अलावा, एयर एंबुलेंस सेवाओं को और विकसित करने के लिए सरकार को भी कई कदम उठाने होंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार एयर एंबुलेंस सेवाओं को और विकसित करने के लिए कई योजनाएं बना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार एयर एंबुलेंस सेवाओं को और सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए कई कदम उठाएगी।


